Dekhiye, गांव-देहात में जिनका भी थोड़ा-बहुत डेयरी का शौक है, उनके लिए यूपी सरकार एक बड़ा मौका लेकर आई है। नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत चल रही मिनी नंदिनी योजना अब उन किसानों और पशुपालकों के लिए है जो देसी गायों की डेयरी शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पैसों की दिक्कत की वजह से रुके हुए थे।
सरकारी कागज़ों में तो यह स्कीम बड़ी शानदार लगती है, तो चलिए अासान भाषा में समझते हैं कि असल में यह योजना है क्या, किसे फायदा मिलेगा और आवेदन कैसे करना है।
असल बात क्या है?
यह योजना 10 देसी गायों (साहीवाल, गीर, थारपारकर) की डेयरी यूनिट लगाने पर कुल लागत का 50%, यानी अधिकतम ₹11.80 लाख तक की सब्सिडी देती है। बाकी पैसों में से 35% बैंक लोन मिल सकता है, बस 15% अपनी जेब से लगाना होगा। आवेदन 21 जुलाई तक ही खुले हैं, तो ज्यादा सोचने का टाइम नहीं है।
योजना में मिलेगा कितना पैसा?
सीधे नंबर्स की बात करें तो एक 10 गायों की डेयरी यूनिट लगाने में कुल खर्चा करीब ₹23.60 लाख आता है। इसमें से सरकार आधा पैसा, यानी ₹11.80 लाख तक सब्सिडी के रूप में दे रही है।
बाकी बचे पैसों का हिसाब कुछ ऐसा है:
- 35% तक बैंक लोन की सुविधा मिल जाएगी
- 15% खुद की जेब से लगाना होगा
मतलब अगर आपके पास शुरुआत में थोड़ा-बहुत पैसा है, तो बैंक लोन और सरकारी सब्सिडी मिलाकर पूरी डेयरी खड़ी की जा सकती है।
किन गायों पर मिलेगा फायदा?
ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह सब्सिडी हर गाय पर नहीं, बल्कि सिर्फ भारतीय देसी नस्ल की गायों पर मिलेगी। इनमें मुख्य रूप से तीन नस्लें शामिल हैं:
साहीवाल गाय
दूध देने के मामले में देसी नस्लों में सबसे भरोसेमंद मानी जाती है।
गीर गाय
इसकी भी अच्छी डिमांड रहती है और दूध की क्वालिटी बढ़िया मानी जाती है।
थारपारकर गाय
राजस्थान की तरफ ज्यादा पाई जाने वाली मजबूत नस्ल है।
एक शर्त और है – जो गाय खरीदी जाएगी वो पहली या दूसरी बार ब्याने वाली होनी चाहिए, और वो 45 दिन से ज्यादा गाभिन नहीं होनी चाहिए। साथ ही हर गाय का ईयर टैग लगवाना और उसका बीमा कराना अनिवार्य है।
कहां-कहां लागू है यह योजना?
ग्राउंड रियलिटी यह है कि सरकार ने इसे कोई चुनिंदा जिलों तक सीमित नहीं रखा। यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू है। एक अच्छी बात और है – डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कुल लाभार्थियों में से 50% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखी गई हैं।
कौन कर सकता है आवेदन?
अब आसान भाषा में समझते हैं कि आवेदन के लिए क्या-क्या शर्तें पूरी करनी होंगी:
- गाय या भैंस पालन का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से सत्यापित)
- डेयरी यूनिट के लिए कम से कम 0.20 एकड़ भूमि उपलब्ध होनी चाहिए
- हरे चारे की व्यवस्था के लिए 0.80 एकड़ भूमि होना जरूरी है – यह अपनी, पैतृक या कम से कम 7 साल की पंजीकृत लीज पर हो सकती है
- भूमि ऐसी होनी चाहिए जहां जलभराव की दिक्कत न हो
- 10 गायों को रखने के लिए पर्याप्त जगह और बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए
किन लोगों को नहीं मिलेगा योजना का फायदा?
एक जरूरी बात यहां साफ कर देते हैं – अगर आपने पहले कामधेनु योजना, मिनी/लघु कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ ले लिया है, तो आप इस स्कीम के लिए पात्र नहीं होंगे।
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक किसान और पशुपालक 21 जुलाई तक योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन नंद बाबा दुग्ध मिशन की ऑफिशियल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन किया जाएगा।
अगर किसी क्षेत्र में ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है, तो चिंता की बात नहीं – आप अपने जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय जाकर या डाक के जरिए भी आवेदन जमा कर सकते हैं।
अगर तय संख्या से ज्यादा आवेदन आ गए, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
सब्सिडी कैसे मिलेगी – दो किस्तों में समझिए
पैसा एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में खाते में आएगा:
पहला चरण: डेयरी शेड और बुनियादी ढांचा तैयार होने पर 25% अनुदान भेजा जाएगा।
दूसरा चरण: तय मानकों के अनुसार गायों की खरीद पूरी होने पर बाकी 25% अनुदान लाभार्थी के खाते में भेजा जाएगा।
यह पूरा पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में जाएगा, तो बीच में किसी दलाल-वलाल की जरूरत नहीं है।
Kuch Zaroori Sawal-Jawab
मिनी नंदिनी योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक डेयरी प्रोत्साहन योजना है, जिसमें 10 देसी गायों की डेयरी यूनिट लगाने पर कुल लागत का 50%, यानी अधिकतम ₹11.80 लाख तक की सब्सिडी दी जाती है।
इस योजना में किन नस्लों की गायों पर सब्सिडी मिलेगी?
योजना का फायदा सिर्फ भारतीय देसी नस्ल की साहीवाल, गीर और थारपारकर गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर मिलेगा।
आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
इच्छुक किसान और पशुपालक 21 जुलाई तक योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑनलाइन या अपने जिले के पशु चिकित्सा कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है।
योजना में बैंक लोन की क्या सुविधा मिलेगी?
योजना के तहत कुल परियोजना लागत का 35% तक बैंक लोन लिया जा सकता है, जबकि लाभार्थी को कम से कम 15% राशि खुद निवेश करनी होगी।
किन लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
जो लोग पहले कामधेनु योजना, मिनी/लघु कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ ले चुके हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
सब्सिडी की राशि खाते में कैसे और कब आएगी?
सब्सिडी दो किस्तों में मिलेगी – पहले डेयरी शेड बनने पर 25% और फिर गायों की खरीद पूरी होने पर बाकी 25%, यह राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।





